भारतीय प्रतिभा का विदेशी लगाव Pramod Mehta, July 22, 2022December 26, 2022 Foreign charm of Indian talent भारतीय प्रतिभा (indian talent) का विदेशी लगाव एक ऐसा विषय है जिसके पक्ष और विपक्ष में अपने-अपने तर्क हैं । यहाँ पर विदेशी लगाव से मेरा आशय भारत छोड़ विदेश जा कर नौकरी/पेशा/व्यापार करने एवं वहाँ पर सैटल होने से है। वर्तमान समय में हमारे देश में शिक्षा गृहण करने के बाद युवा वर्ग का यह प्रयास रहता है कि, वह विदेश में नौकरी, व्यापार या कोई पेशा करे और वहीं पर सैटल हो जाय। यह इच्छा उनकी ही नहीं बल्कि अधिकांश पैरेंट्स की भी रहती है । भारत के बहुत से प्रतिभाशाली व्यक्ति अपनी प्रतिभा का जौहर विदेश में दिखा रहे हैं। दो विशेष कारणों से व्यक्ति भारत छोड़ता है। विदेश में जीवन एवं कार्य करने की बेहतर परिस्थितियाँ और अधिक धन कमाना । दोनों ही कारण बहुत महत्वपूर्ण एवं उपयुक्त हैं। मेरा प्रश्न है, क्या अपना वतन छोडना उचित है ? भारत में जीवन जीने की परिस्थितियों से तो सभी वाकिफ़ हैं इसलिये उनका दोहराना उचित न होगा परंतु विदेश में यह परिस्थितियाँ कितनी अनुकूल एवं माक़ूल है यह विचारणीय प्रश्न है। विदेशों के हालातों का विश्लेषण करने से मालूम पड़ता है कि, वहाँ अपराध भारत के समान ही हैं। विदेशों में भी आये दिन सभी तरह के अपराध होते हैं। शिक्षण संस्थानो में छात्र रिवाल्वर लेकर जाते हैं और किसी को भी शूट करने में हिचकते नहीं हैं । क्या भारत में ऐसा है ? नहीं, क्योंकि ऐसा दुःसाहस भारतीय नागरिक में नहीं है । कुछ देशों के आपराधिक कानून ही इतने कड़े एवं क्रूर हैं कि आदमी की मुसीबत बन जाते हैं जबकि भारतीय कानूनों में लचिलापन है क्योंकि यहाँ पर प्रजातन्त्र है। भारत की छवि बनाई गयी है कि, यहाँ पर आतंकवाद हैतो क्या विदेश में आतंकवाद नहीं है, विश्व में ऐसा कौनसा देश है जो आतंकवाद से अछूता है। यदि भारत में 26/11 है तो अमेरिका में भी 11/9 है। जब भी विदेशों में सरकारें बदलती हैं तब भारतीयों का भविष्य अधर में लटक जाता है । युक्रेन की स्थिति तो सभी को मालूम होंगी ही जहां पर युद्ध के दौरान भारत का तिरंगा झंडा देख कर जान बक्ष दी गयी और सभी को एयर लिफ्ट कर भारत लाया गया। कई ऐसे भी देश हैं जहां पर भारतीयों को दोयम दर्जे (secondary treatment) के व्यवहार का सामना करना पड़ता है जिसका सबसे अच्छा उदाहरण आस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों के साथ किया गया व्यवहार। कई देशों में तो दूसरे धर्म को खुले रूप से मान ही नहीं सकते । घर में छुप कर भगवान की प्रतिमा के दर्शन करो और पेटी में बंद कर दो अन्यथा आप अपराधी, और तो और अपनी संस्कृति को भी नहीं अपना सकते। विदेशों में मौसम की प्रतिकूलताएं एवं अनिश्चितताएं भी बहुत हैं। एक और व्यथा है, परिवार से दूरी । व्यक्ति इतनी दूर जाता है कि उसको भारत आने के लिए सोचना पड़ता है क्योंकि धन और समय बहुत लगता है, और यदि पहुँच भी गए तो इसकी संभावना कम ही है की समय पर संस्कारों में सम्मिलित हो सकें। भारत में निवास कर रहे पैरेंट्स को जब शारीरिक एवं आत्मिक सहायता की आवश्यकता होती है तब उनके पास कोई नहीं होता है । कई बार तो उनके मृत शरीर बंद फ्लॅट/मकान में मिले है। कोरोना महामारी के समय तो विदेशों की भयावह स्थिति को नकारा नहीं जा सकता साथ ही साथ इस दौरान विदेश में रह रहे अनिवासी भारतीयों को अपने देश आकर अपने परिवार एवं समाज की देखभाल नहीं कर पाने का मलाल तो हमेशा ही रहेगा। ‘धन बहुत कुछ होता है परंतु सब कुछ नहीं’। धन की कीमत परिवार की जुदाई के आगे कुछ नहीं और थोड़े से सुख के लिए स्वजनों एवं अपने वतन की उपेक्षा उचित नहीं । भारत में सरकारी एवं निजी संस्थानो ने करोड़ो की राशी लगा कर आदर्श शिक्षा संस्थानों का निर्माण किया परंतु उस शिक्षा का उपयोग विदेशों में हो यह अपने देश के साथ अन्याय है। क्या भारत के नागरिक होने के नाते हमारा यह कर्तव्य नहीं है कि अपने विकासशील देश को विकसित देशों की श्रेणी में लाने के लिए समर्पण करें। अगर हमारी सेना के जवान भी विदेशी सोच रखते तो शायद सेना में कोई भर्ती नहीं होता और जिनके बलिदान के कारण जिस निश्चिंतता से हम एवं अनिवासी भारतीयों के माता-पिता एवं अन्य रिश्तेदार भारत में रह रहे हैं वह शायद संभव नहीं हो पाता । वर्ष 1986 की हिन्दी फिल्म ‘नाम’ का यह गीत “चिट्ठी आई है, आई है, चिट्ठी आई है” अत्यंत सार गर्भित एवं विषय के लिए बहुत ही उपयुक्त पाता हूँ। कभी-कभी तो इसको सुनने के बाद दिल भर जाता है। भारत में रहकर कई हस्तियों ने देश के लिये सर्वस्व एवं सहयोग देकर मिसाल क़ायम की है। आज ऐसे ही उच्च शिक्षित शूरवीरों की भारत को आवश्यकता है जो देश का नेत्रत्व करें और जो ख्याति एवं सम्मान अपने देश में अपनों के बीच प्राप्त होगा वह कल्पना से परे है। विदेश में रह कर भारत का नाम ऊंचा करने से बेहतर है भारत में रह कर विश्वविख्यात होकर नाम कमाना। जन्म, धर्म, और कर्म भूमि का हो साथ, ईश्वर थाम लेगा इंसान का हाथ । मेरी शान – मेरा मान – हिंदुस्तान Positive Thinking