जन्म का महोत्सव Pramod Mehta, September 9, 2022December 5, 2022 Celebration of Birth ब्रह्मांड में चार प्रकार के जीव हैं मानव, पशु व जन्तु एवं वनस्पति और सभी का जन्म तो अवश्य होता ही है परंतु मानव का जन्म सबसे अद्भुत है । लगभग हम सभी जन्म का उत्सव केक काटकर, तिलक लगाकर, संगीत संध्या, यज्ञ/हवन और प्रभु दर्शन आदि तरीके से एक दिन के लिए मनाते हैं । मेरी राय में मानव जन्म का उत्सव कुछ अलग प्रकार से होना चाहिए क्योंकि प्रकृति की यह वो रचना है जो ईश्वर तक बन सकती है इसलिए ईश्वर के बाद हर व्यक्ति के जन्म का उत्सव होना चाहिए, हो सकता है यही वो आत्मा हो जो परम पिता परमेश्वर का अवतार बनें। जन्म के उत्सव को प्रतिदिन मनाना मानव जीवन के महत्व की व्याख्या करता है। अब प्रश्न यह है कि, प्रतिदिन इसको मनाया कैसे जाय ? जिस प्रकार पंचतत्व आकाश, वायु, अग्नि, जल एवं पृथ्वी से सृष्टि का निर्माण हुआ है उसी प्रकार उत्सव के आयोजन में पाँच मुख्य तत्वों का होना ज़रूरी होता है प्रेम, उत्साह, समन्वय, उदारता, एवं धन्यवाद हैं । इस लेख में मानव जन्म के उत्सव के इन पाँच मुख्य विशेष तत्वों को पंचतत्व से संबंध का मंचन है । ‘प्रेम’ (Love) उत्सव का एक प्रमुख तत्व है क्योंकि उत्सव प्रेम से ही मनाया जाता है । प्रेम पंचतत्व के पहले तत्व ‘आकाश’ के समान है जिसका कोई अंत नहीं होता वैसे ही प्रेम अनंत है अतः प्रतिदिन स्वयं, संसार के सभी प्राणी एवं वस्तु से प्रेम पूर्वक रहना जन्म का उत्सव है । मन में प्रेम रहेगा तो दिन के सभी कार्य आसानी से सम्पन्न हो पाएंगे और इच्छित उद्देश्य की प्राप्ति होगी जो हमारे जीवन की जान है। मानव जीवन का उद्धेश्य तो प्रेम ही है। उत्साह/उमंग Enthusiasm उत्सव का एक अभिन्न तत्व है क्योंकि इसके साथ उत्सव मनाना भारतीय संस्कृति की परम्परा है । यह पंचतत्व के दूसरे तत्व ‘वायु’ के समान है अतः प्रतिदिन उमंग एवं उत्साह से अपना कार्य आरंभ करके जन्म के उत्सव को सार्थक करें। वायु जिस उमंग/उत्साह से बहती है, सबको तरोताज़ा करके प्राण का संचार कर देती है ठीक उसी तरह आप भी परिवार,मित्र एवं समाज को अपने उत्साह/उमंग से तरोताज़ा करेंगे तो जन्म उत्सव का आनन्द चरम पर होगा । समन्वय (Coordination) उत्सव का यह प्रेरक तत्व है क्योंकि सबके समन्वय एवं सहयोग से ही उत्सव का आनंद होता है जो पंचतत्व के तीसरे तत्व अग्नि के समान है । प्रतिदिन नई ऊर्जा (अग्नि) के समन्वय से जो कार्य होगा उसमें ईश्वर की भी सहमति रहेगी और हमारा जन्म उत्सव शानदार होगा । समन्वय की ऊर्जा ही मानव शक्ति है । उदारता (Generosity) उत्सव का यह सरल तत्व है क्योंकि जीतने उदार मन से उत्सव मनाया जायगा उसकी सुगंध उतनी दूर-दूर तक फैलेगी इसलिए यह पंचतत्व के चतुर्थ तत्व ‘जल’ के समान है, क्योंकि जल की उदारता को ब्रह्मांड में कोई बराबरी नहीं कर सकता है ठीक इसी तरह प्रतिदिन उदार मन से सबके साथ व्यवहार करके अपने जन्म के महोत्सव में चार चाँद लगाएँ। धन्यवाद (Thanks) उत्सव का यह सहनशील तत्व है क्योंकि हर प्राणी, वस्तु, कार्य, अनुभव एवं ईश्वर को धन्यवाद करना उत्सव का बहुत ही सुंदर हिस्सा है। इसिलिए यह पंचतत्व के पांचवें तत्व ‘पृथ्वी’ के समान जिसको हम धरती माँ के नाम से पुकारते है जिस पर रह कर हम अपना जीवन उत्सव करते हैं और प्रतिदिन शय्या से उठकर अपने पैर धरती पर रखते समय प्रार्थना करते हैं की है माँ में आप पर मेरे चरण रख रहा हूँ, आप मेरा हर तरह का बोझ सहन करेंगी जिसके लिये धन्यवाद देना मेरा कर्तव्य है। यही जन्म के उत्सव की अंतिम कड़ी है जिसमें प्रतिदिन ‘पृथ्वी’ को धन्यवाद की प्रार्थना ही मानव जीवन के जन्म की प्राथमिकता है । मेहनत एवं उत्तम कर्मो से मिले अमूल्य जीवन का जन्म उत्सव वर्ष में एक बार ही मनाकर मात्र औपचारिकता पूरी न करें । हिन्दी फिल्म आनंद का एक संवाद ‘जिंदगी और मौत ऊपर वाले के हाथ और कब कौन कहां उठेगा ये कोई नहीं बता सकता है’। मेरा भी यही अभिप्राय है कि ‘जिंदगी न मिलेगी दोबारा’ इसलिये हर दिन को जन्म दिन की तरह प्रेम, उमंग, समन्वय, उदारता एवं धन्यवाद के साथ मनाना ईश्वर के प्रति सच्ची भक्ति एवं प्रकृति का धन्यवाद है क्योंकि पंचमहाभूत से बना यह जीवन उन्ही की अमानत है इसलिए वर्ष में एक बार मनाकर अमानत में खयानत न करें। है मानव तुम,ईश्वर की अमानत और संसार की उम्मीद हो, प्रकृति का उपहार और वतन के लिए वरदान हो,परमेश्वर के बंदे और उत्सव का आनंद होब्रह्मांड की अद्भुत रचना और पृथ्वी के प्राण हो Cherishable Moments Positive Thinking