हर रिश्ते का रक्षा-बंधन Pramod Mehta, August 10, 2022December 26, 2022 Rakshabandhan of Relations रक्षाबंधन/rakshabandhan भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख उत्सव है। यह त्योहार किसी भी धर्म, जाति, रंग, वर्ण का प्रतिनिधित्व नहीं करता, जैसा की इसके नाम से ही मालूम पड़ता है रक्षा का बंधन जिसकी हर एक प्राणी को ज़रूरत है चाहे वह किसी भी वर्ग का हो । सभी में यह भावना विध्यमान रहती है कि, वह किसी की सहायता (रक्षा) करे या उसकी कोई करे। इस भावना को मूर्त रूप में परिणीत करने को ही रक्षाबंधन के त्योहार के रूप में मनाया जाता है । भारत में इस त्योहार को भाई बहन के रूप में किवदंती के साथ जोड़कर मनाया जाता है । वर्तमान परिपेक्ष्य में, मेरे विचार से इस त्योहार को केवल भाई-बहन तक ही सीमित नहीं करके हर प्रकार के रिश्ते के लिये मनाना उपयोगी सिद्ध होगा। अलग-अलग रिश्तों में रक्षाबंधन का क्या महत्व हो सकता है उस पर सात शोभायमानों के लिये सारांश में सुविचार समर्पित हैं। हमारे इष्ट ईश्वर (Our God) – जिस सर्वशक्तिमान के आगे संसार नतमस्तक है उसके प्रति हमारी समर्पण की भावना तभी मालूम पड़ेगी जब पहली राखी अपने इष्ट देव को समर्पित करके प्रार्थना करें की उनके बताए मार्ग की रक्षा करने की शक्ति हमेशा बनी रहे। God is great हमारा अपना देश (Our Own Country) – सर्वप्रथम तो हम सब की निष्ठा देश के प्रति होना परम कर्तव्य है, क्योंकि देश है तो हम हैं। एक राखी देश प्रेम के नाम पर तिरंगे को बांधकर वचन दें कि देश की संप्रभुता बनी रहे, देश की सार्वजनिक संपत्ति की हानि न हो और ऐसे कार्य करें जिससे देश के मान-सम्मान में वृद्धि हो। 1970 की हिन्दी फिल्म पूरब और पश्चिम का यह गीत “है प्रीत जहां की रीत सदा में गीत वहाँ के गाता हूँ” इसी भावना से ओतप्रोत है। हमारी सेना (Our Military) –अपना सर्वस्व समर्पित कर हमारी रक्षा के लिये दिन रात सीमा पर तैनात सेना के जवानों के कारण हम सभी उत्सव निश्चिंतता से मनाते हैं अतः रक्षाबंधन पर एक राखी भाई समान सेना के जवान को भेजना उनकी देशभक्ति का सम्मान एवं सच्ची सलामी होगी। हमारे माता-पिता (Our Parents) – माता एवं पिता के प्रति संतानों की जवाबदेही होती है इसलिए वे उनका उसी तरह ध्यान रखें जैसा पैरेंट्स ने उनका रखा था । अतः संतानों को रक्षाबंधन के अवसर पर अपने पैरेंट्स से राखी का रेशमी धागा बँधवाकर वचन देना है कि, उनको व्रद्ध-आश्रम में नहीं जाना पड़ेगा। पति-पत्नि (Husband–Wife) – इतिहास में ऐसी मान्यता है कि, युद्ध के लिये प्रस्थान करने के पूर्व राजा एवं सैनिको को उनकी पत्नियाँ भी रक्षा हेतु राखी बांधती थी । मेरे अनुसार आज भी वही परम्परा ज़ारी रखी जाय तो अच्छा ही होगा क्योंकि भारतीय संस्कृति में तो विवाह के समय सात वचन में रक्षा का भी वचन दिया जाता है। हमारा पशुधन (Our livestock) – मूक-प्राणि प्रकृति की एक बहुत आवश्यक एवं महत्वपूर्ण कृति है जिसके प्रति भी हमारी ज़िम्मेदारी बनती है, अतः हर संभव इनकी रक्षा का प्रयास हमारी करुणा की मानसिकता का प्रतीक है। दीपावली के दूसरे दिन भी इनकी पूजा बड़े उत्साह से की जाती है इसलिए इस अवसर पर उनके प्रति अपनी संवेदना का रक्षाबंधन/rakshabandhan अवश्य हो। हमारे लोक सेवक एवं सरकारी अधिकारी (Our Public Servants & Govt.Officials) – लोक सेवक/सरकारी अधिकारी जन हित के कार्यों हेतु नियुक्त होते हैं और नागरिक को उन पर भरोसा रहता है कि, किसी भी प्रकार की समस्या होगी तो कम से कम सरकार तो उसके समाधान का रास्ता निकालेगी अतः वे आम जनता के लिए प्रतिबद्ध होकर रक्षाबंधन/rakshabandhan पर नागरिकों से राखी बँधवाकर जनता के प्रति जवाबदेही की पुष्टि करें। वैसे तो ऐसे कई रिश्ते हैं जहां पर रक्षाबंधन आवश्यक है अतः संक्षिप्त में हम यही कह सकते हैं कि, हर वो शख्श जिससे हमारा शक्ति, प्रेम, समर्पण, कर्तव्य, रक्षा, ज़िम्मेदारी, करुणा एवं भाईचारे का रिश्ता है उसके साथ रक्षाबंधन पर राखी बंधन का संस्कार अवश्य सम्पन्न करके अपनी दरियादिली बताएं । इस महान त्योहार पर एक शपथ अवश्य लेवें । में भारत का नागरिक रक्षाबंधन पर यह वचन देता हूँ कि, ज्ञान या अज्ञानता से देश की अवमानना न करूंगा न होने दूंगा, में सेना के लिये सदा समर्पित रहूँगा, में पैरेंट्स की सेवा का वचन देता हूँ, में हरदम नारी का सम्मान करुंगा, मेरी दिल में मूक-प्राणीयों के लिये हमेशा करुणा होगी, में लोक-सेवक होने के नाते नागरिक के हितों को सर्वोपरि मानूँगा। Cherishable Moments Joyful Lifestyle Positive Thinking